अपराधहरिद्वार

“अवैध खनन के धंधे में कूदा भारतीय किसान यूनियन, अध्यक्ष का क्रशर, चेलों की निकल पड़ी गाड़ियां..

अधिकारियों पर दबाव बनाने की भी चर्चाएं, वायरल वीडियो ने खोली पोल, किसान राजनीति के नाम पर अवैध धंधे का खेल, (देखें वीडियो)..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: अभी तक अवैध खनन के धंधे में नेताओं और बड़े कारोबारी का नाम जुड़ता आया था, लेकिन जनपद के देहात में अब भारतीय किसान यूनियन का एक गुट पूरी तरह अवैध खनन के धंधे में कूद पड़ा है। ऐसा बताया गया है कि गुट के प्रदेश अध्यक्ष ने क्रशर खड़ा किया और चेलों ने ट्रैक्टर ट्रालियों से लेकर खनन करने की अत्याधुनिक मशीनें मैदान में उतार डाली। यह भी चर्चाएं हैं कि खनन पर रोक के बावजूद अवैध खनन करने का दबाव अधिकारियों पर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही साथ ओवरलोड गाड़ियां और ट्रैक्टर ट्राली चलाने के लिए भी खूब किसान राजनीति का इस्तेमाल किया जा रहा है। बेचारे किसानों को तो मालूम भी नहीं होगा कि उनके नाम पर किस तरह से खेल खेला जा रहा है। इतना ही नहीं, एक जिले में तो ग्रामीणों को नाम बंद करते हुए अवैध खनन के नाम पर ही राजनीतिक दुकान खोल डाली है। मामला बंजारे वाला क्षेत्र का बताया जा रहा है। यूं तो खनन पर पूरी तरह रोक है, लेकिन यहां रिजर्व पार्क के महज 400 मीटर के दायरे में जमकर अवैध खनन किया जा रहा है, लेकिन ना तो टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन और ना ही वन विभाग इसे रोक रहा है। वाहनों की ओवरलोडिंग भी सवालों के घेरे में है।
—————————————इस पूरे खेल में स्थानीय स्तर पर प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल किए जाने की भी चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारी भी दबाव में आकर कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं, जिससे यह धंधा और बेखौफ तरीके से फैल रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पूरे मामले की परतें खोल दी हैं। वीडियो में दिनदहाड़े अत्याधुनिक मशीनों से अवैध खनन और ट्रैक्टर ट्रालियों में खनन सामग्री भरकर क्रशर तक पहुंचाने का पूरा खेल साफ तौर पर नजर आ रहा है। साथ ही इस वीडियो को बनाने वाला कोई स्थानीय किसान बताया जा रहा है। जो वीडियो में यह भी कहता हुआ सुनाई पड़ रहा है कि प्रशासन की मिलीभगत से अवैध खनन चल रहा है। यदि इन्हें रोकने का प्रयास किया जाता है तो ग्रामीणों को ही धमकाया जाता है और किसान यूनियन की आड़ में जमकर अवैध खनन का धंधा किया जा रहा है।
—————————————ग्रामीणों के नाम का सहारा लेकर अवैध खनन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर इसे “किसान हित” के नाम पर सही ठहराने का प्रयास किया जा रहा है, कुछ स्थानों पर ग्रामीणों के नाम का सहारा लेकर इस अवैध धंधे को वैध ठहराने की कोशिश की जा रही है। “किसान हित” का हवाला देकर खनन को जायज बताने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में यह पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। स्थानीय स्तर पर इसे एक तरह से राजनीतिक कवच देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
—————————————पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो अवैध खनन का यह नेटवर्क और गहराई तक जड़ें जमा सकता है। फिलहाल प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद की जा रही है, ताकि इस खेल पर लगाम लगाई जा सके।

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