देहरादून

“नगर निगम जमीन खरीद घोटाले पर फिर मचा बवाल, राजस्व परिषद पहुंचा ‘सुराज सेवा दल..

ज्वाइंट सचिव नरेश चंद्र दुर्गापाल को सौंपा ज्ञापन, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून: बहुचर्चित नगर निगम हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले को लेकर एक बार फिर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। शुक्रवार को देहरादून स्थित राजस्व परिषद परिसर में सुराज सेवा दल ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। संगठन ने जांच कर चुके सचिव रणवीर चौहान पर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए ज्वाइंट सचिव राजस्व परिषद नरेश चंद्र दुर्गापाल को ज्ञापन सौंपा।

सुराज सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी ने कहा कि मई-जून 2025 में सामने आए नगर निगम हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया था। सरकार ने मामले में दो आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई कर सख्त संदेश देने की कोशिश की, लेकिन राजस्व विभाग के कई जिम्मेदार अधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को प्रभावित कर वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया।

रमेश जोशी ने कहा कि हरिद्वार में लंबे समय से तैनात लेखपाल अनुज यादव इस पूरे प्रकरण का मुख्य किरदार रहा है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित जमीन से अनुज यादव का सीधा संबंध था और 143 के नोटिस पर स्वयं उसके हस्ताक्षर मौजूद हैं। संगठन ने सवाल उठाया कि बिना किसी टेंडर प्रक्रिया और सार्वजनिक सूचना के नगर निगम ने आखिर उसी जमीन का चयन क्यों किया, जो एक प्रभावशाली लेखपाल से जुड़ी हुई थी।उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम से करोड़ों रुपये का भुगतान होने के बाद अनुज यादव के खाते में भी लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए, लेकिन जांच में इस महत्वपूर्ण तथ्य को दबा दिया गया। सुराज सेवा दल ने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।प्रदर्शन के दौरान क्षेत्रीय कानूनगो रमेश चंद पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। संगठन का कहना है कि रमेश चंद ने कुछ ही घंटों में मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर दी और तत्कालीन तहसीलदार प्रियंका रानी के माध्यम से उसे आगे बढ़ा दिया। रमेश जोशी ने आरोप लगाया कि रमेश चंद के खिलाफ पहले से धोखाधड़ी और मारपीट समेत कई मुकदमे दर्ज हैं, इसके बावजूद उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है।संगठन ने तत्कालीन तहसीलदार प्रियंका रानी की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। आरोप लगाया गया कि कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पदोन्नत कर उपजिलाधिकारी बनाकर बागेश्वर भेज दिया गया। वहीं ग्राम जसवावाला प्रकरण का जिक्र करते हुए संगठन ने दावा किया कि 143 की जांच में फर्जी रिपोर्ट लगाई गई। दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा गया कि रिपोर्ट पर क्षेत्रीय लेखपाल के हस्ताक्षर तक नहीं थे और रिपोर्ट तैयार करने वाला अधिकारी संबंधित क्षेत्र का कानूनगो भी नहीं था।रमेश जोशी ने आरोप लगाया कि सचिव रणवीर चौहान के संबंधित अधिकारियों से पुराने संबंध रहे हैं, जिसके चलते उन्हें लगातार संरक्षण दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लेखपाल अनुज यादव, कानूनगो रमेश चंद और तत्कालीन तहसीलदार प्रियंका रानी के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो राजस्व परिषद परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।प्रदर्शन में महामंत्री देवेंद्र बिष्ट, जिला अध्यक्ष सुमित अग्रवाल, युवा मोर्चा अध्यक्ष विपिन पपोला, कावेरी जोशी, पूजा बिष्ट, पूजा नेगी, संगीता, अमित अग्रवाल, सागर वर्मा, विजेंद्र, कमल धामी, हिमांशु धामी, इरशाद, शहजाद, नवीन, मेहरबान, कुर्बान, कुणाल, दिव्यांश, इकराम, राजेश थापा, ललित श्रीवास्तव, सतेंद्र, घनश्याम, नितेश, वसीला और शिवम समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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