“खाकी के भीतर घुटन का विस्फोट: कोतवाल के आत्मघाती कदम से हिला पुलिस महकमा, उठ रहे सवाल..
व्हाट्सएप ग्रुप में लिखा,‘मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं, पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़कर बचाई जान, कप्तान के रवैया से मातहत हल्कान..
पंच👊नामा-ब्यूरो
उत्तराखंड: पुलिस महकमे में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक कोतवाल ने कथित मानसिक दबाव के चलते आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास कर लिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। साथी पुलिसकर्मियों की तत्परता से उन्हें समय रहते बचा लिया गया,
लेकिन इस घटनाक्रम ने विभागीय कार्यशैली और बढ़ते मानसिक दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसा बताया गया है कि कोतवाल ने कप्तान के तानाशाही रवैया के चलते यह कदम उठाने का प्रयास किया है। इस पूरे मामले को लेकर पूरे उत्तराखंड पुलिस महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
खबर प्रदेश के एक बड़े जिले से हैं। जहां सुबह करीब नौ बजे कोतवाल ने अपने सरकारी आवास में खुद को बंद कर लिया। इसी दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में आत्महत्या करने संबंधी संदेश पोस्ट कर दिया। संदेश पढ़ते ही अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। पुलिसकर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
तबादले, रिलीविंग और कार्यशैली को लेकर भीतर ही भीतर सुलग रहा था असंतोष….
सूत्रों के मुताबिक, घटना के पीछे विभागीय तनाव और तबादले से जुड़ा विवाद अहम कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि एक महिला पुलिस कर्मी की रिलीविंग को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। संबंधित अधिकारी लगातार उच्चाधिकारियों से मामले के समाधान की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इसी बीच अचानक उनके तबादले से जुड़ा आदेश जारी हो गया। इसके बाद से वह लगातार मानसिक तनाव में बताए जा रहे थे।
पुलिस महकमे के भीतर चर्चा है कि जिले में लंबे समय से तबादलों, आमद और रवानी को लेकर असंतोष का माहौल बना हुआ है। बताया जा रहा है कि दूसरे जिलों से स्थानांतरित होकर आने वाले कई पुलिसकर्मी महीनों बाद भी तैनाती का इंतजार कर रहे हैं, जबकि जिन कर्मचारियों के तबादले अन्य जिलों में हो चुके हैं, उनकी समय पर रवानी तक नहीं की जा रही। इससे पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कई कर्मचारियों का कहना है कि लगातार अनिश्चितता, दबाव और निर्णयों में देरी के कारण पुलिस कर्मियों में भीतर ही भीतर नाराजगी बढ़ रही है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने यह भी कहा कि अधीनस्थ अधिकारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता, जिससे मानसिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल, पुलिस कार्यसंस्कृति पर बहस तेज…..
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस जैसे अनुशासित महकमे में अधिकारी खुद मानसिक दबाव से टूटने लगें, तो यह बेहद गंभीर संकेत है। कई लोगों ने पुलिस कर्मियों के लिए बेहतर काउंसिलिंग व्यवस्था और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली मजबूत करने की मांग उठाई है।
आंतरिक रिपोर्ट तलब, विभाग ने साधी चुप्पी…..
हालांकि पुलिस विभाग की ओर से पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जानकारी लेने के साथ आंतरिक रिपोर्ट तलब की है। संबंधित अधिकारी की हालत फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग के भीतर बढ़ते मानसिक तनाव, कार्य संस्कृति और अधिकारियों पर पड़ रहे दबाव को बहस के केंद्र में ला दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई कि एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को इतना बड़ा कदम उठाने की कोशिश करनी पड़ी।



