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“कागजों में बने लाइसेंस, हाथों में पहुंच गए हथियार… STF ने खोला बड़ा राज..

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर STF की दो महीने की खामोश पड़ताल में 10 फर्जी शस्त्र लाइसेंसों का खुलासा..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून: उत्तराखंड में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के सहारे हथियार खरीदने और उन्हें वैध बनाकर इस्तेमाल करने के खेल का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से जारी दर्शाए गए 10 फर्जी शस्त्र लाइसेंस पकड़ लिए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन्हीं लाइसेंसों के आधार पर काशीपुर स्थित गन हाउस से हथियार खरीदे गए थे। मामले में मुकदमा दर्ज कर नेटवर्क से जुड़े एजेंटों, बिचौलियों और अन्य लाभार्थियों की तलाश तेज कर दी गई है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के “अपराध मुक्त उत्तराखंड” के विजन और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशन में एसटीएफ पिछले करीब दो माह से बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर उत्तराखंड की शस्त्र पंजिकाओं में दर्ज हजारों लाइसेंसों का गोपनीय सत्यापन कर रही है। इसी दौरान कई अहम सुराग हाथ लगे और जांच में पता चला कि नौशाद हुसैन समेत 10 लोगों ने शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश से जारी दर्शाए गए लाइसेंसों के आधार पर हथियार खरीदे थे, जबकि जिलाधिकारी कार्यालय शाहजहांपुर से कराए गए सत्यापन में ऐसे किसी लाइसेंस के जारी होने की पुष्टि नहीं हुई।जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों ने योजनाबद्ध तरीके से आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों में शाहजहांपुर का स्थानीय पता दर्शाकर कूटरचित अभिलेख तैयार कराए और उन्हीं के आधार पर फर्जी शस्त्र लाइसेंस हासिल कर हथियारों की खरीद की। लाइसेंस नंबर भी अन्य व्यक्तियों के नाम पर निर्गत पाए गए, जिससे पूरा मामला धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र का साबित हुआ।एसटीएफ ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर काशीपुर कोतवाली में संबंधित धाराओं में नया मुकदमा दर्ज कराया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ कुमाऊं और ऊधमसिंहनगर पुलिस की संयुक्त टीम का गठन किया गया है, जो नामजद और वांछित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। गौरतलब है कि एसटीएफ इससे पहले भी फर्जी शस्त्र लाइसेंस से जुड़े दो मामलों का खुलासा कर दो आरोपितों को जेल भेज चुकी है। एक मामले में फर्जी लाइसेंस के साथ अवैध सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल और कारतूस भी बरामद किए गए थे।एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं। उत्तराखंड पुलिस ऐसे मामलों में “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है और जांच के दौरान सामने आने वाले प्रत्येक तथ्य के आधार पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को फर्जी या संदिग्ध शस्त्र लाइसेंसों के संबंध में कोई सूचना प्राप्त होती है तो वह तत्काल एसटीएफ को अवगत कराएं। सूचनाकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

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