
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाकर करोड़ों के खातों पर नजर रखने वाले शातिरों के एक संगठित खेल का हरिद्वार पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। आईसीआईसीआई बैंक के खाते से करीब 50 लाख रुपये की संदिग्ध निकासी के मामले में पुलिस ने ऐसा पर्दाफाश किया है, जिसने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
फर्जी आधार कार्ड, फोन बैंकिंग और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर लाखों रुपये निकालने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 13 लाख रुपये नकद, एक प्लॉट की रजिस्ट्री, एक स्कूटी, फर्जी दस्तावेज और अन्य अहम सामान बरामद किया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य किरदारों की तलाश में जुट गई है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर इस हाई-प्रोफाइल बैंक फ्रॉड मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए नगर कोतवाली पुलिस ने गहन जांच शुरू की। आईसीआईसीआई बैंक, पुराना रानीपुर मोड़ हरिद्वार के शाखा प्रबंधक अपूर्व दुबे की शिकायत पर दर्ज मुकदमे की विवेचना के दौरान पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। लगातार निगरानी और तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह के निर्देशन में पुलिस टीम ने संदिग्ध मोबाइल लोकेशन के आधार पर भगवानपुर क्षेत्र सहित कई स्थानों पर दबिश दी। प्रारंभिक प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बावजूद टीम ने हार नहीं मानी और दोबारा रणनीति बनाकर मंडावर क्षेत्र के खेड़ी शिकोहरपुर के पास हाईवे से अंदर खेतों की ओर दबिश दी, जहां एक नीली स्कूटी के पास मौजूद दो पुरुष और एक महिला पुलिस को देखकर भागने लगे। पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए तीनों को मौके पर ही दबोच लिया।
शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा के नेतृत्व में की गई कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संगीता देवी, उपेंद्र कुमार सहगल और रीनू कुमार उर्फ सोनू कुमार के रूप में हुई। तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से कुल 13 लाख रुपये नकद, आकाश सिन्हा के नाम का आईसीआईसीआई बैंक डेबिट कार्ड, डेबिट कार्ड आवेदन पत्र, फर्जी आधार कार्ड, मोबाइल फोन, एक स्कूटी व 12 लाख रुपये में खरीदे गए प्लॉट की रजिस्ट्री बरामद की गई। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि डेबिट कार्ड के माध्यम से देहरादून, रुड़की और दिल्ली से करीब 35 लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदी गई थी, जबकि एटीएम से भी लाखों रुपये की नकदी निकाली गई।
इंस्पेक्टर कुंदन सिंह राणा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संगीन और हाई-प्रोफाइल मामलों की गुत्थी सुलझाने में उनकी कार्यशैली और अपराधियों तक पहुंचने की क्षमता बेहद प्रभावी है। विभिन्न कोतवालियों में प्रभारी निरीक्षक के रूप में जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने कई चर्चित मामलों का सफल अनावरण किया है। उच्चाधिकारियों के विश्वास पर लगातार खरा उतरते हुए उन्होंने अपराधियों पर मजबूत पकड़ बनाई है और इस बैंक फ्रॉड के खुलासे ने उनके गुडवर्क की सूची में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी है।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी बड़ी कंपनियों के बैंक खातों की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद बैंक की प्रक्रियाओं और फोन बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग कर खाताधारक की ई-मेल आईडी बदलवाते, फर्जी आधार कार्ड के जरिए नया डेबिट कार्ड हासिल करते और फिर उसी कार्ड से नकदी निकालने के साथ-साथ ज्वेलरी, जमीन और अन्य सामान खरीदते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों की नजर कई बड़ी कंपनियों के खातों पर भी थी। पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। मामले में बरामदगी और विवेचना के आधार पर मुकदमे में विभिन्न धाराओं की बढ़ोतरी की गई है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने की तैयारी की जा रही है, जबकि गिरोह के अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश जारी है।
गिरफ्तार आरोपी….
1:- संगीता देवी पत्नी बिकास कुमार (हाल निवासी सिसौना, थाना भगवानपुर, हरिद्वार, मूल निवासी बिहार)
2:- उपेंद्र कुमार सहगल पुत्र पाल सिंह (निवासी गोविंद विहार, जनकपुरी, सहारनपुर)
3:- रीनू कुमार उर्फ सोनू कुमार पुत्र हुकुम चंद (निवासी मेघछापर, थाना कुतुबशेर, सहारनपुर)
पुलिस टीम….
1:- प्रभारी निरीक्षक कुंदन सिंह राणा
2:- उपनिरीक्षक ऋषिकांत पटवाल
3:- उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार
4:- हेड कांस्टेबल संजीव राणा
5:- कांस्टेबल आनंद तोमर
6:- महिला कांस्टेबल शोभा
7:- कांस्टेबल वसीम (CIU)



