“अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाला: अब खातों से लेकर ‘कुंडली’ तक खंगालेगी एसआईटी, पुराने दागियों के नए खेल की जुड़ सकती हैं कड़ियां..
नामजद शिक्षण संस्थानों में भाजपा से दो टिकट के दावेदार भी शामिल, सियासी गलियारों में हलचल..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; केंद्र सरकार की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में सामने आए कथित करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। छह सदस्यीय एसआईटी केवल कागजों का मिलान नहीं करेगी, बल्कि नामजद शिक्षण संस्थानों के बैंक खातों, आय-व्यय, छात्रवृत्ति की रकम के ट्रांजैक्शन, संचालकों की भूमिका और उनके पुराने रिकॉर्ड तक की गहन पड़ताल करेगी। सिडकुल थाने में दर्ज मुकदमे की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी धन वास्तव में छात्रों तक पहुंचा या फिर सुनियोजित तरीके से उसका दुरुपयोग किया गया।
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी प्रत्येक संस्थान के प्रवेश रजिस्टर, उपस्थिति, परीक्षा रिकॉर्ड, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) पर अपलोड किए गए दस्तावेज, बैंक खातों और लाभार्थियों के विवरण का मिलान करेगी। जरूरत पड़ने पर बैंकिंग ट्रेल और वित्तीय लेनदेन की भी जांच होगी, ताकि छात्रवृत्ति की रकम का पूरा रास्ता सामने आ सके।
सबसे अहम बात यह है कि इस बार जांच के घेरे में आए कुछ शिक्षण संस्थान पहले भी समाज कल्याण विभाग के बहुचर्चित एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले में दागी रह चुके हैं। उस घोटाले में करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति में गड़बड़ी के आरोप लगे थे और कई मुकदमे दर्ज हुए थे। अब एसआईटी यह भी खंगालेगी कि कहीं वही नेटवर्क और वही तरीका अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में तो नहीं अपनाया गया।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। एफआईआर में नामजद संस्थानों में भाजपा के दो चर्चित नेताओं के कॉलेज भी शामिल हैं। दिलचस्प यह है कि दोनों नेता अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से पार्टी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में जांच के हर कदम पर राजनीतिक नजरें भी टिकी हुई हैं।
सूत्र बताते हैं कि एसआईटी केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संचालकों की पूरी पृष्ठभूमि, पूर्व के मामलों में उनकी भूमिका और आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल करेगी। यदि जांच में यह सामने आता है कि फर्जी छात्रों, कागजी दाखिलों या फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी धन निकाला गया है, तो धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य पहलू भी विवेचना में जोड़े जा सकते हैं।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्य आधारित होगी और किसी भी प्रभाव या दबाव से परे निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी। लेकिन जिस तरह पुराने छात्रवृत्ति घोटाले के दागी संस्थानों के नाम फिर सामने आए हैं, उसने इस मामले को और अधिक संवेदनशील और चर्चित बना दिया है। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि एसआईटी की जांच किन नए चेहरों और किन नए खुलासों तक पहुंचती है।



