हरिद्वार

कांवड़ मेले में शानदार ट्रैफिक मैनेजमेंट, पुलिस के होमवर्क और अफसरों की ग्राउंड जीरो पर सक्रियता से शहर को मिली राहत..

मेले में सुकून से रहा अधिकांश शहर, नजीर बनी व्यवस्थाएं, पुलिस कप्तान नवनीत सिंह की ग्राउंड मॉनीटरिंग और एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह की माइक्रो प्लानिंग बनी गेमचेंजर..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: कांवड़ मेला अपने चरम पर पहुंचा तो धर्मनगरी में शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा, लेकिन इस बार शहर के बड़े हिस्से में सामान्य जनजीवन पर इसका असर बेहद सीमित रहा। रोजाना लाखों कांवड़ यात्रियों की मौजूदगी के बावजूद मध्य हरिद्वार, ज्वालापुर और भेल क्षेत्र की अधिकांश कॉलोनियों में न जाम की स्थिति बनी और न कांवड़ यात्रियों का दबाव नजर आया। पिछले कई वर्षों की तुलना में कांवड़ मेले का यह सुचारू संचालन पुलिस प्रशासन की बेहतर प्लानिंग, मजबूत नेतृत्व और ग्राउंड पर उसके प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम रहा।ग्राउंड जीरो पर एसएसपी नवनीत सिंह की सक्रियता बनी ताकत…..
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने यातायात प्लान तैयार कराने के साथ उसके धरातल पर अनुपालन को भी प्राथमिकता दी। मेले के पहले दिन से वह लगातार ग्राउंड जीरो पर सक्रिय रहे और अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर यातायात, बैरिकेडिंग, डायवर्जन तथा पुलिस बल की तैनाती का जायजा लेते रहे। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित से बेहतर तालमेल बैठाने के साथ-साथ उन्होंने व्यवस्था को केवल पूर्व निर्धारित प्लान के भरोसे नहीं छोड़ा। मौके की स्थिति के अनुसार पुलिस अधिकारियों से फीडबैक लेकर आवश्यक बदलाव किए गए। किस मार्ग पर कितना दबाव है, कहां अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत है और किस संपर्क मार्ग से कांवड़ यात्रियों को शहर में प्रवेश करने से रोका जाना है, इन बिंदुओं पर एसएसपी की लगातार निगरानी रही। यही वजह रही कि हाईवे पर उमड़ने वाली भीड़ को शहर के अंदरूनी हिस्सों में फैलने से काफी हद तक रोका जा सका।
एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह की माइक्रो प्लानिंग रही कारगर
एसपी सिटी व मेला नोडल अधिकारी अभय प्रताप सिंह ने एसएसपी की रणनीति को मैदान में उतारने में अहम भूमिका निभाई। कावड़ यात्री किन-किन रास्तों से हरिद्वार में प्रवेश करते हैं और उनकी निकासी कहां-कहां से होती है, एक-एक प्वाइंट चिन्हित करने के साथ ही ड्यूटी प्वाइंट तय कर, प्रत्येक प्वाइंट पर पुलिसकर्मियों की संख्या तय करने, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल लगाने और यातायात को निर्धारित रूट पर बनाए रखने तक माइक्रो लेवल पर प्लानिंग की गई। एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह ने पूर्व के कांवड़ मेलों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उन स्थानों को पहले ही चिन्हित किया, जहां भीड़ के दबाव से यातायात प्रभावित हो सकता था। ड्यूटी प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मियों से लगातार फीडबैक लिया गया। कहीं दबाव बढ़ा तो तत्काल बल और यातायात व्यवस्था को समायोजित किया गया। हाईवे से शहर की ओर आने वाले संपर्क मार्गों पर बैरिकेडिंग और पुलिस तैनाती की निगरानी भी लगातार की गई। यही माइक्रो मैनेजमेंट व्यवस्था को अंतिम समय तक सुचारू बनाए रखने में कारगर रहा।हाइवे से शहर को बचाने की रणनीति रही कारगर……
इस बार कांवड़ यात्रियों को शहर के भीतर से निकालने के बजाय हाईवे से सीधे कनखल की ओर भेजने की रणनीति अपनाई गई। हाईवे को शहर से जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर मजबूत बैरिकेडिंग सुरक्षा कवच साबित हुई।सिंहद्वार से कांवड़ यात्रियों को आर्यनगर होते हुए मिश्रित आबादी वाले ज्वालापुर क्षेत्र में भेजने के बजाय हाईवे से सीतापुर बाईपास और वहां से नहर पटरी की ओर उतारा गया। इससे आर्यनगर, दयानंद नगरी और इस्लामनगर समेत आसपास के इलाकों में यातायात और शांति व्यवस्था का दबाव नहीं बना।एसपी क्राइम/यातायात निशा यादव और एसपी देहात शेखर सुयाल ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही दूसरे जिलों से कावड़ मेला ड्यूटी पर आए राजपत्रित अधिकारियों, उप निरीक्षक और इंस्पेक्टरों ने भी जमकर पसीना बहाया।व्यापारियों, संतों और सामाजिक संगठनों ने सराहा……
व्यवस्था का असर स्थानीय स्तर पर भी दिखाई दिया। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार कांवड़ मेले के बावजूद व्यापारिक गतिविधियां अपेक्षाकृत सुचारू रहीं। रिहायशी इलाकों के लोगों ने भी कांवड़ यात्रियों की भीड़ और यातायात दबाव कम रहने को बड़ी राहत बताया। संत समाज और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने भी पुलिस प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की। शहर के लिए बनी नजीर…
कनखल के कुछ हिस्सों और लक्सर मार्ग से जुड़ी कॉलोनियों में डाक कांवड़ यात्रियों के पड़ाव जरूर दिखाई दिए, लेकिन मध्य हरिद्वार, ज्वालापुर और भेल क्षेत्र के अधिकांश रिहायशी इलाकों में मेले का दबाव महसूस नहीं हुआ। लाखों शिवभक्तों की आमद के बीच शहर का बड़ा हिस्सा सामान्य बना रहा। पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार कांवड़ मेला अधिक स्मूथ और नियंत्रित नजर आया। एसएसपी नवनीत सिंह की सजग लीडरशिप, ग्राउंड जीरो पर निरंतर सक्रियता और एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह की माइक्रो प्लानिंग ने यातायात व्यवस्था को मजबूत आधार दिया। स्थानीय लोगों, व्यापारियों, संतों और सामाजिक संस्थाओं की सकारात्मक प्रतिक्रिया इस व्यवस्था की सफलता का अहम प्रमाण बनी।

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