‘अमेरिकन आश्रम’ की जमीन पर खेल का आरोप, DM-SSP के दरबार पहुंची शिकायत.!
100 साल पुरानी धार्मिक धरोहर खुर्द-बुर्द करने और करीब 3 बीघा जमीन की बिक्री से लेकर कब्जे तक उठे सवाल; फोरेंसिक ऑडिट और SIT जांच की मांग..
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; भूपतवाला क्षेत्र स्थित रानीगली के ‘अमेरिकन आश्रम/स्वामी देवानंद ट्रस्ट’ की संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है। नगर निगम हरिद्वार के वार्ड संख्या-2 भूपतवाला की पार्षद सुनीता शर्मा ने जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित व एसएसपी हरिद्वार को शिकायत देकर आश्रम की संपत्ति पर कथित कब्जे, ट्रस्ट की जमीन की बिक्री और वहां किए जा रहे व्यावसायिक इस्तेमाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति को कथित तौर पर खुर्द-बुर्द कर निजी हित में इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्षद ने मामले में दोषी पाए जाने वाले ट्रस्ट पदाधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
शिकायत के मुताबिक रानीगली, भूपतवाला स्थित अमेरिकन आश्रम धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति है और इसका संबंध लंबे समय से धार्मिक गतिविधियों से रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों की आस्था इस आश्रम से जुड़ी होने का दावा किया गया है। आरोप है कि संपत्ति के कुछ हिस्से पर कथित रूप से कब्जा कर उसे निजी इस्तेमाल में लिया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आश्रम की जमीन पर पूर्व में भंडारा, निशुल्क दवा वितरण और धर्मशाला जैसी गतिविधियां संचालित होती थीं। आरोप है कि अब संपत्ति के स्वरूप में बदलाव कर वहां दुकानों और रेस्टोरेंट समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
पार्षद की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आश्रम की कुल भूमि में से करीब तीन बीघा संपत्ति को कथित तौर पर खुर्द-बुर्द किया गया। शिकायत के अनुसार, इस भूमि के कुछ हिस्से की बिक्री भी किए जाने का आरोप है। वहीं आश्रम के आसपास बनी दुकानों में कथित रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने संपत्ति के हस्तांतरण और रजिस्ट्री की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले में जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत में धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए रजिस्ट्री और संपत्ति के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है। पार्षद का कहना है कि यदि ट्रस्ट की संपत्ति का हस्तांतरण नियमों के विपरीत हुआ है तो इसकी वैधानिकता की जांच आवश्यक है। साथ ही संपत्ति के कागजात, रजिस्ट्री, लेनदेन और संबंधित बैंक खातों की जांच कराने की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संपत्ति के संबंध में किन लोगों ने क्या भूमिका निभाई और किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन हुआ या नहीं।
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि आश्रम की संपत्ति के आसपास किए गए कथित कब्जे और निर्माण से कांवड़ मार्ग प्रभावित हो रहा है। पार्षद ने प्रशासन और पुलिस से मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच कराने और यदि निर्माण या कब्जा नियमविरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। पार्षद सुनीता शर्मा ने मामले में जांच पूरी होने तक आश्रम की संपत्ति के संबंध में किसी भी प्रकार के नए निर्माण, बिक्री, हस्तांतरण व स्वरूप परिवर्तन पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के दौरान संपत्ति की स्थिति में बदलाव होने से साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।
पार्षद की ये छह प्रमुख मांगें है…
1:- जिलाधिकारी हरिद्वार व धर्मस्व विभाग के स्तर से मामले की उच्चस्तरीय जांच/SIT जांच कराई जाए।
2:- यदि बिक्री या हस्तांतरण अवैध पाया जाता है तो उसे निरस्त कराने की कार्रवाई करते हुए संपत्ति को सरकारी संरक्षण में लिया जाए।
3:- दोषी ट्रस्ट पदाधिकारियों व अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच के आधार पर उचित आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
4:- संपत्ति पर यदि कोई निर्माण नियमविरुद्ध पाया जाता है तो तत्काल रोक लगाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
5:- संपत्ति के सभी कागजात, रजिस्ट्री और बैंक खातों की फोरेंसिक ऑडिट कराई जाए।
6:- जांच पूरी होने तक आश्रम की संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए जाएं।
धार्मिक आस्था से जुड़ी इस संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वास्तव में ट्रस्ट की जमीन का नियमविरुद्ध हस्तांतरण हुआ? जमीन की रजिस्ट्री किन परिस्थितियों में हुई? संपत्ति से जुड़े आर्थिक लेनदेन किसके माध्यम से हुए और वर्तमान में वहां संचालित व्यावसायिक गतिविधियां किस आधार पर चल रही हैं? इन सभी सवालों का जवाब अब प्रशासनिक और पुलिस जांच से ही सामने आएगा।



