“कांवड़ मेले की भीड़ में बिछड़ी मूक-बधिर महिला को आख़िरकार मिल ही गया परिवार..
देवभूमि बधिर एसोसिएशन और इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के विशेषज्ञों की मदद से हुई पहचान, बेटी समेत परिजनों को सौंपा गया..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; कांवड़ मेले की भीड़ में परिवार से बिछड़ी मूक-बधिर महिला सुमन आखिरकार अपने परिजनों से मिल गई। महिला को सुरक्षित रूप से वन स्टॉप सेंटर, बहादराबाद में रखा गया था।
देवभूमि बधिर एसोसिएशन और इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (आईएसएलआरटीसी), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के विशेषज्ञों ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से महिला से संवाद स्थापित कर उसकी पहचान और इच्छा की पुष्टि कराई।
इसके बाद कनखल पुलिस और वन स्टॉप सेंटर प्रशासन ने महिला को उसकी बेटी सहित परिजनों के सुपुर्द कर दिया। कई दिनों से बहू सुमन और बेटे करण का कोई पता नहीं चलने पर महिला के ससुर राजकुमार उनकी तलाश में हरिद्वार पहुंचे। खोजबीन के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि उनकी बहू वन स्टॉप सेंटर, बहादराबाद में सुरक्षित है। इसके बाद वे सेंटर पहुंचे।
सांकेतिक भाषा से खुला पहचान का राज……..
महिला से बातचीत के लिए देवभूमि बधिर एसोसिएशन की प्रदेश प्रवक्ता एवं सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ सोनिया अरोड़ा तथा इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर की एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य संदीप अरोड़ा को बुलाया गया। दोनों विशेषज्ञों ने महिला से इशारों में बातचीत कर उसके साथ आए व्यक्ति के बारे में पूछा। महिला ने सांकेतिक भाषा में बताया कि वह उसके पति के पिता हैं। जब उससे पूछा गया कि क्या वह उनके साथ जाना चाहती है, तो उसने अपनी सहमति भी इशारों में व्यक्त कर दी।
पति से संपर्क की कोशिश, फिर पूरी हुई सत्यापन प्रक्रिया……
संदीप अरोड़ा ने महिला के पति करण से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। इसके बाद महिला की पहचान, पारिवारिक संबंध और अन्य आवश्यक तथ्यों का विस्तृत सत्यापन किया गया।
बेटी समेत परिजनों को सौंपी गई महिला……..
सभी औपचारिकताएं पूरी होने और पहचान की पुष्टि के बाद कनखल पुलिस तथा वन स्टॉप सेंटर प्रशासन ने मूक-बधिर महिला सुमन और उसकी बेटी शिवानी को उनके ससुर राजकुमार के सुपुर्द कर दिया। इस दौरान थाना कनखल से महिला कांस्टेबल प्रियंका और सुमन चौहान, वन स्टॉप सेंटर से पैरालीगल एडवोकेट टीनू शर्मा, जांच सदस्य ज्योति सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने बताया संवाद का महत्व……
देवभूमि बधिर एसोसिएशन की प्रदेश प्रवक्ता सोनिया अरोड़ा ने कहा कि मूक-बधिर व्यक्तियों के मामलों में सांकेतिक भाषा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होती है। वहीं इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर की एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य संदीप अरोड़ा ने बताया कि महिला की पहचान और उसकी सहमति पूरी तरह सुनिश्चित करने के बाद ही उसे परिजनों के सुपुर्द किया गया। पुलिस, वन स्टॉप सेंटर, देवभूमि बधिर एसोसिएशन और आईएसएलआरटीसी के समन्वित प्रयास से कांवड़ मेले की भीड़ में बिछड़ा परिवार फिर से एक हो सका।



