हरिद्वार

“चिलचिलाती धूप भी नहीं डिगा सकी अकीदत… दो मासूमों ने पैदल नाप दिया कलियर का रास्ता.!

जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी पर पिता के साथ हाथों में झंडा लेकर निकले नन्हे कदम, राहगीर भी दे रहे हिम्मत की दाद..

खबर को सुनें

पंच👊नामा
रुड़की; चिलचिलाती धूप और तपती सड़कों के बीच अकीदत का ऐसा खूबसूरत मंजर देखने को मिला, जिसने राह चलते लोगों को भी ठहरकर देखने पर मजबूर कर दिया। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी और हज़रत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक रहमतुल्लाह अलैह के 758वें सालाना उर्स के मौके पर रुड़की निवासी समीर अली शेख अपने दो नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ हाथों में झंडा लेकर पैदल ही पिरान कलियर के लिए निकल पड़े।करीब 8 से 10 किलोमीटर के इस सफर में समीर शेख के साथ उनके महज 4 वर्षीय बेटे अब्दुल रहीम और 6 वर्षीय बेटी रहमत भी कदम से कदम मिलाकर चलते नजर आए। भीषण गर्मी के बावजूद दोनों मासूमों के हौसले और अकीदत को देखकर राहगीर भी हैरान रह गए और उनकी हिम्मत की दाद देते नजर आए।दरअसल, आज दुनिया भर में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी पूरे अकीदत और मोहब्बत के साथ मनाया जा रहा है। इसी दिन विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक में आयोजित सालाना उर्स का मुख्य दिन और बड़ी रोशनी भी विशेष अहमियत रखती है। इस वर्ष दरगाह साबिर पाक का 758वां सालाना उर्स मनाया जा रहा है, जिसमें देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंच रहे हैं।समीर अली शेख और उनके बच्चों की यह पैदल यात्रा सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि साबिर पाक से मोहब्बत और पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब से निस्बत की अटूट अकीदत का जीवंत उदाहरण बन गई। तपती धूप में नन्हे कदमों से तय होता यह रास्ता हर किसी को यही एहसास करा रहा था कि जब दिल में सच्ची मोहब्बत और अकीदत हो, तो उम्र और मुश्किलें भी हौसलों के आगे छोटी पड़ जाती हैं।नन्हे बच्चों के इस जज्बे को देखकर लोग उनकी हिम्मत और जज्बे की दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं। रास्ते भर यह परिवार लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा और हर कोई इन मासूम बच्चों की अटूट आस्था को सलाम करता नजर आया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!