अपराधहरिद्वार

“72 घंटे में अंतर्राज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़, हरिद्वार और दिल्ली के दो मासूम सकुशल बरामद..

दो पति-पत्नी समेत 6 आरोपी गिरफ्तार, दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड तक फैले नेटवर्क का पर्दाफाश, निसंतान दंपतियों को बेचे जाते थे बच्चे..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: कनखल के बैरागी कैंप से तीन वर्षीय मासूम राधिका के अपहरण के मामले में हरिद्वार पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 72 घंटे के भीतर अंतर्राज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया। एसएसपी नवनीत सिंह की सीधी निगरानी में चली कार्रवाई में पुलिस ने दो महिलाओं सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के चंगुल से अपहृत राधिका के साथ-साथ दिल्ली से चोरी किए गए करीब डेढ़ वर्षीय बालक कार्तिक को भी सकुशल बरामद कर लिया गया। मामले में मानव तस्करी की धाराएं भी शामिल की गई हैं।छह जून को बैरागी कैंप स्थित झुग्गी-झोपड़ी निवासी विनोद सोलंकी की तीन वर्षीय पुत्री राधिका को अज्ञात व्यक्ति उठाकर ले गया था। घटना के बाद कनखल कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया। बच्चे से जुड़े संवेदनशील मामले को देखते हुए एसएसपी नवनीत सिंह ने तत्काल कई पुलिस टीमों का गठन कर हर घंटे प्रगति रिपोर्ट तलब करनी शुरू कर दी। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने फिरौती के बजाय बच्चा चोरी गिरोह और पुरानी रंजिश सहित अन्य पहलुओं पर जांच केंद्रित की।डिजिटल और मैनुअल पुलिसिंग का समन्वय करते हुए पुलिस टीमों ने सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, डंप डाटा का विश्लेषण किया और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। सोशल मीडिया का भी सहारा लिया गया। लगातार तीन दिन तक चले ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में ताबड़तोड़ दबिश दी। कार्रवाई का दबाव बढ़ने पर गिरोह के अन्य सदस्य अपहृत बच्ची को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर लावारिस छोड़कर फरार हो गए। सूचना मिलने पर हरिद्वार पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची और राधिका को सकुशल बरामद कर लिया।गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। गिरोह ने 24 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से कार्तिक नाम के करीब डेढ़ वर्षीय बच्चे का अपहरण किया था। बाद में उसे बदायूं में डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया गया। पुलिस ने बच्चे को भी सुरक्षित बरामद कर लिया है और दिल्ली पुलिस को मामले की जानकारी देकर अग्रिम कार्रवाई के लिए सूचित किया गया है।पूछताछ में सामने आया कि गिरोह संगठित तरीके से काम करता था। कुछ सदस्य बच्चों को चुराने, कुछ उन्हें दूसरे राज्यों तक पहुंचाने, कुछ खरीदार तलाशने और कुछ फर्जी माता-पिता बनकर सौदा कराने का काम करते थे। निसंतान दंपतियों को निशाना बनाया जाता था और बच्चों की कीमत दो लाख से पांच लाख रुपये तक तय की जाती थी। पुलिस के अनुसार मोहम्मद आकिल और प्रीति शर्मा गिरोह में बच्चों का रेट तय करने और बिक्री कराने की अहम भूमिका निभाते थे।गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद आकिल पुत्र अनीश अहमद निवासी पायती कला थाना डिडौली अमरोहा, उसकी पत्नी नसीमा, जुल्फेकार पुत्र स्वर्गीय जमील अहमद निवासी दरियापुर थाना अमरोहा देहात, धर्मेंद्र कुमार पुत्र स्वर्गीय होशराम निवासी सिकंदरपुर थाना भोपा मुजफ्फरनगर, उसकी पत्नी प्रीति शर्मा तथा शिवा सिंह उर्फ गौरव निवासी सिवान बिहार शामिल हैं। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसपी क्राइम निशा यादव, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी सहित पूरी पुलिस टीम मौजूद रही।पूरे ऑपरेशन में वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनुज सिंह, उपनिरीक्षक नरेंद्र सिंह, महिपाल सैनी, गंभीर तोमर, नवीन चौहान, अपर उपनिरीक्षक ललित मोहन अधिकारी, मुन्ना नेगी, हेड कांस्टेबल जितेंद्र शाह, अश्विनी शर्मा, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार, उमेद सिंह, विपिन सकलानी, दिगपाल भंडारी, मनीष रावत, निर्मल रांगड़ और राकेश सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एसओजी टीम से प्रभारी नरेंद्र सिंह बिष्ट, कांस्टेबल वसीम, हरवीर सिंह रावत, दीप गौड़, उमेश कुमार और नरेंद्र शामिल रहे। वहीं एएचटीयू टीम से हेड कांस्टेबल राकेश कुमार तथा कांस्टेबल दीपक चंद रमोला और महिला कांस्टेबल शशिबाला ने भी कार्रवाई में अहम योगदान दिया। एसएसपी नवनीत सिंह ने कहा कि एक मां से किया गया वादा पुलिस ने पूरा किया है। बच्चा चोरी और मानव तस्करी जैसे अपराधों में शामिल किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा।

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