“पिरान कलियर से गरजे मौलाना अरशद मदनी, बोले- नफ़रत नहीं, मोहब्बत से चलेगा मुल्क..
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के प्रदेश अधिवेशन में बुलडोजर कार्रवाई, मॉब लिंचिंग और मुसलमानों की कुर्बानियों का किया ज़िक्र, 70 जहीन तलबा का हुआ सम्मान..

पंच👊नामा
पिरान कलियर: आस्था और रूहानियत की नगरी पिरान कलियर में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद उत्तराखंड की प्रदेश कार्यकारिणी के अधिवेशन में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने मौजूदा हालात, मुल्क की आज़ादी में मुसलमानों और मदरसों की कुर्बानियों, बुलडोज़र कार्रवाई, फिरकापरस्ती और मोहब्बत व भाईचारे के पैग़ाम को लेकर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मुल्क नफ़रत से नहीं, बल्कि प्यार, मोहब्बत और इंसानियत के रास्ते पर ही आगे बढ़ सकता है।
मंगलवार को पिरान कलियर स्थित शमीम साबरी कॉलोनी में जमीयत उलेमा-ए-हिंद उत्तराखंड के प्रदेश कार्यालय पर प्रदेश कार्यकारिणी का अधिवेशन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अधिवेशन में प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों, उलेमा, मदरसा प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने शिरकत की।
अपने ख़िताब की शुरुआत करते हुए मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि साबिर पाक की नगरी पिरान कलियर में जमीयत उलेमा-ए-हिंद का यह मुबारक जलसा आयोजित होना खुशी की बात है। उन्होंने जमीयत के इतिहास पर रोशनी डालते हुए कहा कि संगठन की बुनियाद वर्ष 1919 में रखी गई थी। हज़रत शेखुल हिन्द को मुल्क की आज़ादी की जद्दोजहद के चलते पौने चार साल तक सात समंदर पार माल्टा जेल में कैद रखा गया। वतन वापसी के बाद उनके शागिर्दों ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के बैनर तले मुल्क की आज़ादी की लड़ाई लड़ी।
उन्होंने कहा कि जमीयत और मुसलमानों ने देश की आज़ादी के लिए अपनी जानों की कुर्बानी दी। मदरसों से आज़ादी की तहरीक चली और 1857 में अंगेजो की मुख़ालिफ़त के चलते हजारों मुसलमानों ने शहादत पेश की। उन्होंने दावा किया कि 32 हजार मुसलमानों को दिल्ली में फांसी पर लटका दिया गया था। इसके बावजूद आज मुसलमानों को गद्दार कहा जाता है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग आज सत्ता में बैठे हैं, वे बताएं कि देश की आज़ादी के लिए उनका क्या योगदान रहा।
मौलाना मदनी ने कहा कि जिन मस्जिदों और मदरसों पर आज बुलडोज़र चलाए जा रहे हैं, उनका इतिहास मुल्क की आज़ादी से जुड़ा हुआ है। अगर किसी में दम है तो इन तारीख़ों को झूठा साबित करके दिखाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की हुकूमत सिर्फ मुसलमानों की नहीं बल्कि इस्लाम की भी मुख़ालिफ़ है और मज़हबी जगहों को निशाना बनाया जा रहा है, जिसकी जमीयत मुख़ालफ़त करती है।
उन्होंने कहा कि जमीयत ने कभी सियासत के लालच में काम नहीं किया। अंग्रेजों से देश को आज़ाद कराने के बाद संगठन ने ऐलान कर दिया था कि वह एक सियासी नहीं बल्कि मज़हबी और समाजी तहरीक के तौर पर काम करेगा। वर्ष 1919 से लेकर 2026 तक जमीयत हमेशा प्यार, मोहब्बत और आपसी भाईचारे का पैग़ाम देती चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में फिरकापरस्ती की सियासत को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुल्क इस तरह नहीं चल सकता, बल्कि मोहब्बत और इंसानियत के रास्ते पर ही आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को मॉब लिंचिंग, बुलडोज़र कार्रवाई और इबादतगाहों को निशाना बनाए जाने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है, जबकि यह उसी कौम को दिया जा रहा सिला है जिसने देश के लिए बड़ी-बड़ी कुर्बानियां दीं।
उलेमा और तलबा को नसीहत करते हुए उन्होंने कहा कि अपने बुजुर्गों के इतिहास को पढ़ें और उसे नई नस्ल तक पहुंचाएं। जमीयत का किरदार हमेशा हिन्दू-मुस्लिम एकता, भाईचारे और इंसानियत की ख़िदमत का रहा है। अगर किसी में दम है तो वह जमीयत के किरदार को चुनौती देकर दिखाए।
उन्होंने कहा कि पंजाब, बिहार, बंगाल समेत देश के विभिन्न हिस्सों में जब भी किसी तबके पर आफ़त आई, जमीयत ने मज़हब नहीं बल्कि इंसानियत के आधार पर मदद पहुंचाई। दिल्ली में आग लगने की घटना का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक मुसलमान गद्दा व्यापारी ने लोगों की जान बचाने के लिए अपने गद्दे ज़मीन पर बिछा दिए थे। मुसलमानों ने हमेशा अपने किरदार से इंसानियत का पैग़ाम दिया है।
मौलाना मदनी ने कहा कि हुकूमतें आती-जाती रहती हैं, लेकिन अल्लाह की हुकूमत हमेशा कायम रही है और रहेगी। उन्होंने हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात का ज़िक्र करते हुए कहा कि इंसानियत, पड़ोसियों से मोहब्बत और भाईचारे का व्यवहार ही असली पैग़ाम है, चाहे वह हिन्दू हो, मुसलमान हो, सिख हो या किसी अन्य मज़हब से ताल्लुक रखता हो। कार्यक्रम के समापन पर मुल्क और प्रदेश में अमन, सलामती, तरक्की और इंसानियत की भलाई के लिए ख़ास दुआ कराई गई।
इस अवसर पर 70 होनहार तलबा को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। वहीं संगठन द्वारा शिक्षा, राहत कार्य, समाज सुधार, कानूनी सहायता और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा भी की गई। कार्यक्रम के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष व देहरादून के शहर काज़ी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश की गई।
इस मौके पर कलियर विधायक हाजी फुरकान अहमद, लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद, प्रदेश अध्यक्ष मौलाना हुसैन अहमद कासमी, प्रदेश महासचिव मौलाना शराफत अली कासमी, मौलाना कमरुज्जमा, मौलाना अब्दुल वाहिद, मौलाना अब्दुल मन्नान कासमी, मौलाना जियाउर्रहमान, मुफ्ती तौफीक इलाही, मुफ्ती ताजीम, मौलाना हारून, मुफ्ती इकराम, मौलाना मजहर अनवर, सलीम अहमद, राव आफाक अली, हाजी नोशद, गोल्डन भाई समेत बड़ी संख्या में उलेमा, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।



