“यौम-ए-आशूरा पर इंसानियत का पैग़ाम, दस दिन चला नियाज़-ए-हुसैनी लंगर..
अंजुमन ग़ुलामान-ए-अहल-ए-बैत (अ.स.) सोसाइटी की पहल को शहरवासियों का मिला भरपूर सहयोग..

पंच👊नामा
रुड़की। माह-ए-मुहर्रमुल हराम की 10 तारीख़ (यौम-ए-आशूरा) के अवसर पर अंजुमन ग़ुलामान-ए-अहल-ए-बैत (अ.स.) सोसाइटी, रुड़की द्वारा आयोजित “हुसैन सबके हैं” थीम पर आधारित दस दिवसीय नियाज़-ए-हुसैन लंगर सेवा अभियान का समापन बड़े अदब व अकीदत के साथ किया गया।
यौम-ए-आशूरा इस्लामी तारीख़ का वह दिन है, जब 61 हिजरी में कर्बला की सरज़मीन पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.), उनके अहल-ए-बैत और वफ़ादार साथियों ने दीन-ए-इस्लाम, इंसानियत, इंसाफ़ और हक़ की ख़ातिर अपनी जानों की अज़ीम कुर्बानी पेश की। इमाम हुसैन (अ.स.) ने ज़ुल्म के सामने सर झुकाने के बजाय शहादत को चुना और पूरी दुनिया को यह पैग़ाम दिया कि हक़ की राह में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, उससे पीछे नहीं हटना चाहिए।
अंजुमन ग़ुलामान-ए-अहल-ए-बैत (अ.स.) सोसाइटी, रुड़की द्वारा 1 मुहर्रम से लगातार प्रतिदिन नियाज़-ए-हुसैन का आयोजन किया जा रहा था। दस दिनों तक बिना किसी रुकावट के राहगीरों, ज़रूरतमंदों एवं आम लोगों के लिए वेजिटेरियन लंगर तक़सीम किया गया, जिसमें छोले-चावल, राजमा-चावल, कढ़ी-चावल, कबुली चने-चावल, दाल मख़नी-चावल तथा अन्य विभिन्न व्यंजनों की नियाज़ पेश की गई। आज 10 मुहर्रम (यौम-ए-आशूरा) के अवसर पर इस दस दिवसीय सेवा अभियान का समापन किया गया।
अंजुमन के सेक्रेटरी कुँवर शाहिद ने बताया कि इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में आयोजित यह दस दिवसीय नियाज़-ए-हुसैन केवल लंगर तक़सीम करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि कर्बला के पैग़ाम को आम करने की एक छोटी-सी कोशिश है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने इंसानियत, हक़, इंसाफ़, सब्र और इज़्ज़त-ए-नफ़्स के लिए जो अज़ीम कुर्बानी पेश की, वही पूरी इंसानियत के लिए मशअल-ए-राह है। हमारा मक़सद हर धर्म, हर तबक़े और हर इंसान तक मोहब्बत, भाईचारे और ख़िदमत का पैग़ाम पहुँचाना है। अल्हम्दुलिल्लाह, लगातार दस दिनों तक शहरवासियों, दोस्तों, पड़ोसियों और ख़ादिमीन का भरपूर सहयोग और मोहब्बत मिली, जिसके लिए अंजुमन सभी का दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा करती है।यौम-ए-आशूरा के अवसर पर अंतिम दिन मटर-पनीर और चावल की नियाज़ बड़ी तादाद में राहगीरों, ज़रूरतमंदों एवं आम लोगों में मोहब्बत के साथ तक़सीम की गई।
इसी के साथ इमाम हुसैन (अ.स.) और शुहदा-ए-कर्बला की प्यास की याद को ताज़ा करते हुए राहगीरों को ठंडा मिल्कशेक बोतलों में भरकर भी पेश किया गया। अंजुमन के सदस्यों ने बताया कि यह सिर्फ़ एक पेय पदार्थ नहीं, बल्कि कर्बला के उस दर्दनाक मंज़र की एक छोटी-सी याद है, जब फ़ुरात का दरिया सामने होने के बावजूद अहल-ए-बैत (अ.स.) पर पानी बंद कर दिया गया था। इस सबील का उद्देश्य लोगों तक इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सब्र और इंसानियत का पैग़ाम पहुँचाना था।
अंजुमन के सदस्यों ने बताया कि इस दस दिवसीय सेवा अभियान का उद्देश्य किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं था, बल्कि हर आने-जाने वाले इंसान तक मोहब्बत, भाईचारे, सेवा और इंसानियत का पैग़ाम पहुँचाना था। यही वजह रही कि इन दस दिनों में हर धर्म, हर वर्ग और हर उम्र के लोगों ने नियाज़-ए-हुसैन में शिरकत की और मोहब्बत के साथ इस ख़िदमत का हिस्सा बने। इस अवसर पर अंजुमन की ओर से सभी ख़ादिमीन का विशेष रूप से शुक्रिया अदा किया गया, जिन्होंने अपने कारोबार, नौकरी, निजी व्यस्तताओं और आराम से ऊपर उठकर पूरे दस दिनों तक लगातार अपनी सेवाएँ दीं। अंजुमन ने कहा कि इन्हीं लोगों की बे-लौस ख़िदमत और ख़ुलूस की बदौलत यह मुहिम कामयाबी के साथ मुकम्मल हो सकी।
इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी शहज़ाद अहमद, गुड्डू साबरी, रिज़वान अली, मुहम्मद फरमान, रामपाल सिंह, आसिफ अली उर्फ़ हैदर, बिलाल खान, जनाब नसीम अहमद (साइकिल वाले), सलमान अहमद, फरजान अहमद, साहिल खान, डॉ. सैयद अतीक, गौरव बंसल, साकिब शहज़ाद, मोनिश, सोनू चाय वाले, सुहेल खान तथा अमजद ठेकेदार सहित अंजुमन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
अंत में सभी ने शुहदा-ए-कर्बला को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए दुआ की कि अल्लाह तआला इमाम हुसैन (अ.स.) और अहल-ए-बैत (अ.स.) की मोहब्बत पर क़ायम रखे तथा समाज में भाईचारे, इंसानियत, अमन और आपसी सौहार्द को हमेशा क़ायम रखे।



