अपराधहरिद्वार

“धर्मनगरी के मिनी ठेकों पर सिस्टम ही नहीं, धार्मिक और सामाजिक संगठन भी मौन, उठ रहे सवाल..

कई किलोमीटर से खाना सूंघने वालों को नहीं आता नज़र, बिरयानी को पुलाव साबित करने वाले भी बेखबर, कलंकित हो रही धर्मनगरी, क्यों आहत नहीं होती भावनाएं..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार की पहचान आस्था, गंगा और सनातन परंपराओं से है। यहां धर्म और संस्कृति की रक्षा के नाम पर समय-समय पर आवाज़ें बुलंद होती रही हैं। लेकिन जब बात खुलेआम चल रहे अवैध शराब के मिनी ठेकों और शराब की होम डिलीवरी के नेटवर्क की आती है, तो न केवल सिस्टम की चुप्पी सवालों के घेरे में आ जाती है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक संगठनों की खामोशी भी लोगों को हैरान कर रही है।धर्मनगरी में चल रहे शराब के मिनी ठेकों पर सिस्टम ही नहीं धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी चुप्पी की चादर ओढ़ी हुई है। समय-समय पर धर्मनगरी की मर्यादा का हवाला देते हुए तीर्थ क्षेत्र में छापेमारी करने वाले संगठनों को मीलों दूर से खुशबू आ जाती है कि चूल्हे पर क्या पक रहा है। लेकिन धड़ल्ले से चल रही मिनी ठेको और शराब की होम डिलीवरी करते माफिया के गुर्गों को वह देख नहीं पाते या फिर जानबूझकर आंखें मूंद लेते हैं। इतना ही नहीं, वेज बिरयानी को धर्मनगरी की गरिमा के विपरीत बताकर उसे पुलाव साबित करने वाले संगठन के लोग अपने ही समाज के महापुरुष के नाम वाले चौराहे की बगल में रोजाना शराब की मंडी लगाते हुए देखते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। सवाल यह है कि इन गतिविधियों से धर्म नगरी की गरिमा और मर्यादा क्यों प्रभावित नहीं होती…? हर महीने करोडों का धंधा करने वाले शराब माफिया जयसवाल, शंकर और राजपूत आदि रोजाना गंगा घाट और तीर्थ क्षेत्र को कलंकित करते हैं मगर धार्मिक भावनाएं क्यों आहत नहीं होती हैं..?
————————————-विडंबना यह भी है कि जिन स्थानों के आसपास महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित हैं और जहां धार्मिक आयोजनों के दौरान संस्कृति व संस्कारों की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, उन्हीं इलाकों के आसपास रोजाना शराब के मिनी ठेके और स्टाल गुलजार होते हैं।
————————————-धार्मिक संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि उनका उद्देश्य वास्तव में धर्मनगरी की गरिमा और पवित्रता की रक्षा करना है, तो फिर शराब के इस धंधे पर उनकी आवाज़ मुखर क्यों नहीं होती है? क्या धार्मिक भावनाएं केवल चुनिंदा विषयों पर ही आहत होती हैं? यदि वास्तव में हरिद्वार की धार्मिक पहचान और सामाजिक वातावरण को सुरक्षित रखना है, तो अवैध शराब के मिनी ठेकों, होम डिलीवरी और उससे जुड़े नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
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अगली किश्त में… ” शराब माफिया की अफसर-नेताओं से “मांडवाली” कराने में कथित पत्रकार भी सक्रिय, कई हसीनाएं भी बिखेर रहीं जलवे….

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