“हरिद्वार में आखिर क्या कर रहा खुफिया तंत्र.? हर बड़ी घटना के बाद ही क्यों हरकत में आता सिस्टम..?
सांप्रदायिक विवाद, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और नशे के मामलों में समय रहते नही मिल रहे इनपुट, जनता पूछ रही सवाल..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: जिले में लगातार सामने आ रहे सांप्रदायिक विवाद, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और नशे के धंधे के मामलों ने खुफिया विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर से लेकर देहात तक खुफिया विभाग के अफसरों और कर्मचारियों का पूरा नेटवर्क मौजूद होने के बावजूद समय रहते कोई ठोस इनपुट पुलिस प्रशासन तक नहीं पहुंच पा रहा है। हालात यह हैं कि कई मामलों में अचानक स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस को पूरी ताकत के साथ मोर्चा संभालना पड़ रहा है।
खुफिया विभाग को पुलिस प्रशासन की आंख और कान माना जाता है। विभाग की जिम्मेदारी संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखना, सांप्रदायिक तनाव की आशंका को पहले ही भांपना और कानून व्यवस्था बिगड़ने से पहले प्रशासन को अलर्ट करना होता है। हालांकि, हरिद्वार जिले में पिछले कुछ समय के घटनाक्रम विभाग की सक्रियता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सांप्रदायिक मामलों में भी नहीं मिल पा रहे समय पर इनपुट….
जिले में कई बार शोभायात्राओं, जुलूसों और अन्य घटनाओं के दौरान सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी। कई मामलों में दो समुदाय आमने-सामने तक आ गए, लेकिन उससे पहले खुफिया विभाग की ओर से कोई प्रभावी इनपुट सामने नहीं आया। नतीजा यह रहा कि विवाद बढ़ने के बाद पुलिस प्रशासन को अचानक भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभालना पड़ा। जानकारों का कहना है कि यदि संवेदनशील इलाकों में पहले से निगरानी और सूचना तंत्र मजबूत हो तो ऐसे मामलों को बढ़ने से पहले रोका जा सकता है।
कलियर और ढंडेरा मामलों ने बढ़ाए सवाल……
हाल ही में पिरान कलियर क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर पुलिस की छापेमारी और संदिग्ध ट्रांजेक्शन नेटवर्क से जुड़े मामले ने भी स्थानीय खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। जम्मू-कश्मीर एसटीएफ हरिद्वार पहुंची, कार्रवाई हुई, लेकिन स्थानीय खुफिया विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसी तरह ढंडेरा क्षेत्र में सामने आए संदिग्ध गतिविधियों के मामले में भी विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में रही। संवेदनशील क्षेत्र में गतिविधियां चलती रहीं, लेकिन समय रहते कोई इनपुट सामने नहीं आया। मीडिया में खबर आने के बाद ही विभागीय स्तर पर हलचल दिखाई दी।
नशे के धंधे पर भी प्रभावी इनपुट का अभाव…..
हरिद्वार जिले में नशे का धंधा लगातार फैल रहा है। शहर से लेकर देहात तक स्मैक, चरस, गांजा और नशीले इंजेक्शन की सप्लाई के मामले सामने आते रहे हैं। पुलिस लगातार कार्रवाई कर तस्करों को पकड़ रही है और कई बड़े खुलासे भी हुए हैं, लेकिन खुफिया विभाग की ओर से बड़े नेटवर्क और गतिविधियों को लेकर समय पर इनपुट नहीं मिल पा रहे हैं।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब अचानक किसी गतिविधि की जानकारी सामने आती है तो तत्काल अतिरिक्त फोर्स लगाकर स्थिति संभालनी पड़ती है। यदि पहले से इनपुट मिलें तो कार्रवाई और अधिक प्रभावी हो सकती है।
पूर्व में भी पकड़े जा चुके हैं संदिग्ध….
रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में पूर्व वर्षों में आतंकी गतिविधियों से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके बावजूद संवेदनशील इलाकों में निगरानी व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जिले की संवेदनशीलता को देखते हुए खुफिया विभाग को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय किए जाने की जरूरत है।
जवाबदेही पर उठ रहे सवाल….
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद अब लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर खुफिया विभाग का नेटवर्क जमीनी स्तर पर कितना सक्रिय है। पुलिस जहां मौके पर पहुंचकर हालात संभालने में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है, वहीं खुफिया विभाग पर समय रहते सटीक इनपुट देने में नाकाम रहने के आरोप लग रहे हैं।
जिले में बढ़ते सांप्रदायिक विवाद, संदिग्ध गतिविधियां और नशे के मामलों ने यह साफ कर दिया है कि खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत व सक्रिय बनाए जाने की जरूरत है, ताकि किसी भी बड़ी घटना से पहले प्रशासन को सतर्क किया जा सके।



