टूटे मोबाइल ने खोला राज, 72 घंटे बाद अज्ञात शव को मिली पहचान… हरिद्वार पुलिस की मेहनत से बेटे ने किए “पिता” के अंतिम दर्शन..
ज्वालापुर पुलिस की सूझबूझ लाई रंग, हिमाचल से जुड़े तार… SSP नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर चला संवेदनशील ऑपरेशन..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: गंगनहर में मिले एक अज्ञात शव की पहचान कर उसे परिजनों तक पहुंचाने में ज्वालापुर पुलिस ने ऐसा मानवीय और सराहनीय कार्य किया है, जिसने पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली को फिर साबित कर दिया।
पुलिस मुख्यालय स्तर से चलाए जा रहे अज्ञात शवों की शिनाख्त अभियान के तहत महज एक टूटे और क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन के सहारे पुलिस ने तीन दिन की अथक मेहनत के बाद हिमाचल प्रदेश निवासी मृतक की पहचान कर परिजनों को अंतिम दर्शन का अवसर दिलाया।
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर हरिद्वार पुलिस लगातार अज्ञात शवों की शिनाख्त को लेकर गंभीरता से कार्य कर रही है। इसी क्रम में कोतवाली ज्वालापुर पुलिस ने संवेदनशीलता और तकनीकी सूझबूझ का परिचय देते हुए एक ऐसे शव की पहचान कर दिखाई, जिसके पास कोई पहचान पत्र या दस्तावेज तक मौजूद नहीं था। पुलिस की इस कार्यवाही की परिजनों ने भी खुले दिल से सराहना की।
प्रभारी निरीक्षक चंद्रभान सिंह अधिकारी के नेतृत्व में ज्वालापुर पुलिस टीम ने मामले में लगातार प्रयास जारी रखे। दरअसल, बीती 04 मई को जटवाड़ा पुल गंगनहर, रेगुलेटर पुल के पास एक अज्ञात पुरुष का शव बरामद हुआ था। पंचायतनामा की कार्रवाई के बाद शव को जिला अस्पताल हरिद्वार की मोर्चरी में रखवाया गया, लेकिन पहचान न होने से मामला चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।
तलाशी के दौरान मृतक की जेब से एक पुराना और टूटा हुआ मोबाइल फोन मिला, जिसमें एक सिम कार्ड लगा था। पुलिसकर्मियों ने सिम को सक्रिय कर उससे जानकारी जुटाने की कोशिश शुरू की, लेकिन शुरुआती प्रयास नाकाम रहे। इसके बावजूद पुलिस ने उम्मीद नहीं छोड़ी और सिम को लगातार एक्टिव रखा।
आखिरकार 06 मई को उस नंबर पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने बताया कि यह नंबर “बिट्टू” नाम के व्यक्ति का है, जो उसके यहां कारपेंटर का काम करता था। उसके द्वारा दिए गए दूसरे नंबर पर संपर्क करने पर मृतक की पुत्री हंसा देवी से बात हुई। उन्होंने बताया कि उनके पिता ताराचंद उर्फ बिट्टू, निवासी राजगढ़ मंडी हिमाचल प्रदेश, पिछले कई दिनों से लापता थे और नौकरी की तलाश में घर से निकले थे।
पुलिस ने व्हाट्सएप के माध्यम से मृतक के फोटो परिजनों को भेजे, जिन्हें देखकर उन्होंने अपने पिता के रूप में पहचान की पुष्टि की। इसके बाद मृतक का पुत्र नवीन कुमार हरिद्वार पहुंचा और मोर्चरी में शव देखकर पहचान सुनिश्चित की। पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
भावुक परिजनों ने उत्तराखण्ड पुलिस और ज्वालापुर पुलिस का आभार जताते हुए कहा कि यदि पुलिस इतनी संवेदनशीलता और मेहनत से प्रयास नहीं करती तो उन्हें अपने पिता के अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं हो पाते। शिनाख्त में अपर उपनिरीक्षक कमला चौहान और कांस्टेबल मनोज डोभाल की सराहनीय भूमिका रही।


