हरिद्वार

“पीआरडी जवान चंद रुपयों रिश्वत लेता गिरफ्तार और राम मंदिर के कई सौ करोड़ चोरी करने वाले पुलिस सुरक्षा में घूम रहे लग्जरी गाड़ियों में: पाहवा

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: हिंदू क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चरणजीत पाहवा ने अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और संपत्तियों के गायब होने के आरोपों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एक ओर रिश्वत लेने के आरोप में गरीब और निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी कर ली जाती है, जबकि दूसरी ओर भगवान राम के नाम पर जुटाई गई करोड़ों रुपये की संपत्ति और बहुमूल्य धरोहरों के गायब होने के आरोपों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।पाहवा ने कहा कि यदि एक पीआरडी जवान के खिलाफ चंद रुपयों की रिश्वत लेने के मामले में प्रशासन पूरी ताकत के साथ कार्रवाई कर सकता है तो फिर राम मंदिर से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के घोटालों और कीमती सोना-चांदी, आभूषण व अन्य संपत्तियों के गायब होने के मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, वे आज भी प्रभाव और रसूख के दम पर लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं, जबकि छोटे कर्मचारियों पर तुरंत कानून का डंडा चल जाता है।उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यदि मंदिर की संपत्तियों और दान में मिली बहुमूल्य वस्तुओं को लेकर कोई गड़बड़ी हुई है तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ भी खिलवाड़ है। ऐसे मामलों में लीपापोती के बजाय निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए।पाहवा ने मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय न्यायिक या केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों की चल-अचल संपत्तियों की भी पड़ताल की जाए। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में सभी समान होने चाहिए। यदि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है तो प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को भी किसी प्रकार की छूट नहीं मिलनी चाहिए।उन्होंने कहा कि देश की जनता और करोड़ों रामभक्त यह जानना चाहते हैं कि आस्था से जुड़े इतने गंभीर आरोपों पर अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। सरकार को इस मामले में स्पष्ट स्थिति सामने लाकर दोषियों को कानून के दायरे में लाना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास कायम रह सके।

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