देहरादून

“कानूनगो पर कार्रवाई में देरी से भड़का सुराज सेवादल, राजस्व परिषद में दिखाए तल्ख तेवर, काटा हंगामा..

आयोग से अनुमति मिलने की जानकारी के बाद भी कार्रवाई न होने पर जताई नाराजगी, (देखें वीडियो)..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून/हरिद्वार। भ्रष्टाचार और भूमि संबंधी अनियमितताओं के आरोपों में घिरे हरिद्वार में तैनात कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर सुराज सेवादल का गुस्सा फूट पड़ा। संगठन के पदाधिकारियों ने राजस्व परिषद में पहुंचकर तीखी नाराजगी जताई और अधिकारियों से जवाब तलब किया। संगठन का आरोप है कि पिछले एक माह से अधिक समय से लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन संबंधित कानूनगो के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।सुराज सेवादल के उपाध्यक्ष सुमित अग्रवाल ने राजस्व परिषद अध्यक्ष को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि संबंधित कानूनगो पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भूमि हड़पने, राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी करने तथा अन्य वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। उनके खिलाफ विभिन्न स्तरों पर मुकदमे भी दर्ज बताए गए हैं। संगठन का दावा है कि कई मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के बावजूद कार्रवाई को जानबूझकर टाला जा रहा है।संगठन के अनुसार 22 मई को सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राजस्व परिषद पहुंचकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। उस समय अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसके बाद सुराज सेवादल के अध्यक्ष रमेश जोशी और महामंत्री देवेंद्र बिष्ट ने भी कई बार अधिकारियों से संपर्क कर मामले की जानकारी ली। हर बार कुछ दिनों में कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन जमीन पर कोई नतीजा दिखाई नहीं दिया।पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम भूमि घोटाले के मामले में रिकॉर्ड समय में अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर दी गई थी, जबकि इस प्रकरण में कार्रवाई लगातार लटकाई जा रही है। इससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।हंगामे के दौरान राजस्व परिषद की उपसचिव मीनाक्षी पटवाल ने संगठन के प्रतिनिधियों को बताया कि कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग से अनुमति आवश्यक थी। अब अनुमति प्राप्त हो चुकी है और संबंधित फाइल पर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई में अब और विलंब नहीं होगा तथा शुक्रवार तक आवश्यक आदेश जारी किए जा सकते हैं।हालांकि सुराज सेवादल ने साफ कर दिया है कि यदि इस बार भी केवल आश्वासन ही मिला और कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। पदाधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में देरी से जनता का विश्वास कमजोर होता है और दोषियों का मनोबल बढ़ता है। अब सभी की निगाहें राजस्व परिषद के अगले कदम पर टिकी हैं।

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