“पिरान कलियर दरगाह में फर्जी खादिमों का खेल या ‘वसूली’ का नेटवर्क? पीआरडी जवान का पैसे लेते वीडियो वायरल, जिम्मेदारों की निगरानी पर सवाल..

पंच👊नामा
पिरान कलियर; विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक (रह.) में देश के कोने-कोने से जायरीन अपनी आस्था और उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। कोई मन्नत लेकर आता है तो कोई दुआओं का दामन थामे दरबार में हाजिरी लगाता है। अपनी हैसियत के मुताबिक चढ़ावा भी पेश करता है। लेकिन जिस दरगाह की पहचान रूहानी सुकून और अकीदत से जुड़ी है, वहां की व्यवस्थाएं आए दिन ऐसे सवालों में घिर जाती हैं, जिनका जवाब जिम्मेदारों के पास होना चाहिए।
ताजा मामला एक वायरल वीडियो का है, जिसमें एक पीआरडी जवान एक युवक से पैसे लेता हुआ नजर आ रहा है। युवक को फर्जी खादिम बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में दोनों के बीच पहले कुछ बातचीत होती दिखाई देती है। इसके बाद युवक कथित तौर पर नाराजगी में पीआरडी जवान के हाथ पर पैसे रखकर वहां से चला जाता है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह जांच का विषय है कि आखिर पैसे किस बात के लिए, लिए गए थे। वीडियो ने दरगाह शरीफ की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब दरगाह शरीफ में कथित अवैध उगाही का मामला चर्चा में आया हो। इससे पहले भी दरगाह परिसर से अवैध वसूली और जायरीनों से पैसे लेने से जुड़े वीडियो सामने आ चुके हैं। ऐसे में सवाल सीधा है—अगर दरगाह परिसर में आने वाले जायरीनों की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तैनात सुरक्षाकर्मी ही किसी तरह की कथित वसूली के आरोपों में घिरने लगें, तो फिर निगरानी किसकी और किस पर होगी?
दरगाह शरीफ की व्यवस्थाओं का जिम्मा दरगाह कार्यालय के अधीन है और रुड़की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की निगरानी में व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। दरगाह कार्यालय में प्रबंधक के साथ कई सुपरवाइजर और दर्जनों कर्मचारी तैनात हैं। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पीआरडी जवानों की भी तैनाती की गई है। व्यवस्था का ढांचा इतना बड़ा होने के बावजूद यदि दरगाह परिसर में फर्जी खादिम सक्रिय बताए जाते हैं, जायरीनों से कथित वसूली की शिकायतें सामने आती हैं, मारपीट होती है और जेब कटने जैसी घटनाएं होती रहती हैं, तो फिर सवाल व्यवस्था की निगरानी पर उठना स्वाभाविक है।
दरगाह में तैनाती सुरक्षा के लिए है या फिर व्यवस्था के नाम पर ‘वसूली तंत्र’ को संरक्षण देने के लिए? यह सवाल वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर उठ रहा है और इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आना चाहिए। दरगाह शरीफ में दूर-दराज से आने वाले जायरीन स्थानीय व्यवस्था और कर्मचारियों पर भरोसा करते हैं। उन्हें यह उम्मीद रहती है कि दरगाह परिसर में उन्हें सुरक्षित माहौल मिलेगा और कोई उन्हें ठगने या परेशान करने की कोशिश नहीं करेगा। लेकिन यदि फर्जी खादिमों की मौजूदगी के आरोप लगातार सामने आते रहें और जिम्मेदार कर्मचारी उन्हें रोकने के बजाय कथित तौर पर लेन-देन में उलझे नजर आएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
दरगाह परिसर में मारपीट, फर्जी खादिमों की सक्रियता, जायरीनों की जेब कटने और कथित अवैध वसूली जैसे मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे में दरगाह की व्यवस्था संभालने वाले विभाग और निगरानी अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। एक तरफ जायरीन चढ़ावा और नजराना लेकर दरबार में पहुंचते हैं, दूसरी तरफ यदि उन्हीं जायरीनों को कथित वसूली, ठगी या असुरक्षा का सामना करना पड़े तो यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि दरगाह की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा सवाल है। ये दो पंक्तियां मौजूदा हालात पर खूब फिट बैठती हैं— “हिफाजत जिनके हाथों में थी, वही हिसाब मांगने लगे,
जायरीन दुआ लेकर आए, कुछ लोग अपना हिसाब बनाने लगे।
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। वीडियो में दिखाई दे रहे पीआरडी जवान की भूमिका क्या थी, युवक से पैसे किस कारण लिए गए, युवक वास्तव में फर्जी खादिम है या नहीं और क्या यह किसी अवैध वसूली का हिस्सा था—इन सभी सवालों का जवाब जांच से ही सामने आएगा। क्योंकि सवाल सिर्फ एक वायरल वीडियो का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है, जिस पर देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले हजारों जायरीन भरोसा करते हैं। रक्षक की भूमिका अगर संदिग्ध हो जाए तो सबसे बड़ा नुकसान व्यवस्था का नहीं, भरोसे का होता है। और दरगाह जैसी जगह पर भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी है।



