“शेखपुरी की संकरी गली में खड़ी हो रही ऊंची इमारत, HRDA की निगरानी पर उठे सवाल.!
महज 12-13 फीट के रास्ते पर बहुमंजिला निर्माण का आरोप, नोटिस के बाद भी कार्रवाई का इंतजार! नियमों की अनदेखी पर कब जागेगा प्राधिकरण.?

पंच👊नामा
रुड़की; शहर में अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने के दावों के बीच शेखपुरी क्षेत्र में एक बहुमंजिला इमारत का निर्माण सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि बेहद संकरी गली में भवन निर्माण के नियमों और निर्धारित मानकों की अनदेखी कर बड़े स्तर पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभाग की ओर से कथित तौर पर नोटिस जारी किए जाने के बावजूद निर्माण स्थल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। ऐसे में हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, शेखपुरी की जिस गली में यह बहुमंजिला इमारत बनाई जा रही है, उस सड़क की चौड़ाई महज 12 से 13 फीट बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर निर्माण को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या इतने संकरे रास्ते पर बहुमंजिला भवन के निर्माण की अनुमति निर्धारित मानकों के अनुरूप है? यदि निर्माण नियमों के विपरीत हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी और संबंधित विभाग ने समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए?
निर्माण को लेकर एक अन्य गंभीर सवाल भवन के किनारों पर पर्याप्त खाली जगह यानी साइड बैक नहीं छोड़े जाने को लेकर भी उठ रहा है। आरोप है कि भवन निर्माण के दौरान इस पहलू की भी अनदेखी की गई है। यदि यह स्थिति सही पाई जाती है, तो इसकी जांच कर भवन निर्माण के लागू मानकों के अनुसार कार्रवाई किया जाना जरूरी है। संकरी गली और आसपास घनी आबादी होने के कारण भविष्य में किसी आपात स्थिति की आशंका भी चिंता का विषय है। आगजनी या अन्य हादसे की स्थिति में दमकल वाहनों और राहत-बचाव दलों को मौके तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में निर्माण की वैधता के साथ ही अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन पहुंच से जुड़े पहलुओं की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल HRDA की कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्राधिकरण को निर्माण के संबंध में पहले ही जानकारी मिल गई थी और कथित तौर पर विभाग की ओर से नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य पर प्रभावी रोक लगाए जाने या सीलिंग जैसी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि नोटिस जारी किया जा चुका है, तो यह जानना जरूरी है कि उसके बाद विभाग ने क्या कदम उठाए? क्या निर्माणकर्ता की ओर से नोटिस का जवाब दिया गया?
क्या स्थल का निरीक्षण कर निर्माण की स्वीकृतियों और मानचित्र की जांच की गई? और यदि अनियमितताएं पाई गईं, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इन सवालों पर प्राधिकरण की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रशासन और विकास प्राधिकरण समय-समय पर सख्ती की बात करते रहे हैं। ऐसे में शेखपुरी का यह मामला विभागीय निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया की कसौटी बन गया है। स्थानीय स्तर पर भी इस निर्माण को लेकर सवाल उठ रहे हैं और लोग चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।
फिलहाल, निर्माण की वैधता, स्वीकृत नक्शे, सड़क की वास्तविक चौड़ाई और साइड बैक से जुड़े आरोपों की बात सामने आ रही है। ऐसे में HRDA की ओर से निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करना और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक है। अब निगाहें प्राधिकरण पर हैं। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण की जांच करेंगे या नोटिस जारी होने के बाद भी मामला फाइलों तक ही सीमित रहेगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में विभाग की कार्रवाई से ही सामने आएगा।



