“हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाला: सीएम धामी का डबल एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी की संस्तुति, 10 लोगों पर दर्ज होंगे मुकदमे..
तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट, एसडीएम की तीन वेतनवृद्धियां रोकी गईं; विजिलेंस जांच में आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित..

पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून: हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में राज्य सरकार ने शुक्रवार को बड़ा और बहुस्तरीय एक्शन लिया। एक ओर तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी की सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति की गई है,
वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के विरुद्ध मेजर पनिशमेंट (दीर्घ शास्ति) की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही विजिलेंस जांच में अनियमितताओं और आर्थिक नुकसान के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए जाने के बाद 10 लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने को भी मंजूरी दे दी गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुमोदन के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में अभियोग दर्ज किए जाएंगे।
अभियोजन की जद में आने वालों में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं। इसके अलावा भूमि विक्रेता सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
सरकार ने समानांतर रूप से विभागीय कार्रवाई भी आगे बढ़ाई है। तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह को अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ मेजर पनिशमेंट की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के सेवा अभिलेख में परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि नगर निगम द्वारा की गई भूमि खरीद को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे थे। मामले के सामने आने के बाद सरकार ने जांच बैठाई थी, जिसमें कई स्तरों पर प्रक्रियागत अनियमितताओं और वित्तीय नुकसान के संकेत मिले थे। विशेष जांच और विजिलेंस की पड़ताल के बाद अब सरकार ने विभागीय और आपराधिक दोनों स्तरों पर कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है।
इस कार्रवाई के साथ हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण अब पूरी तरह आपराधिक जांच के दायरे में पहुंच गया है और आने वाले दिनों में मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ और अन्य कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा सकती हैं।



