
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: कचरा प्रोसेसिंग प्लांट में काम करने वाले युवक की मौत ने सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। ड्यूटी के दौरान हालत बिगड़ने के बावजूद न इलाज मिला, न अस्पताल। मृतक की पत्नी ने कोर्ट की मदद से आगरा की कंपनी के महाप्रबंधक समेत पांच व्यक्तियों के खिलाफ थाना श्यामपुर में मुकदमा दर्ज कराया है।
मामला नीलधारा पार्किंग क्षेत्र में संचालित कचरा प्रोसेसिंग यूनिट का है, जहां नगर निगम के ठेके पर आगरा की कंपनी काम कर रही है। अरुण, जेसीबी मशीन ऑपरेटर था और चंडीदेवी वन क्षेत्र में तैनात था। उसकी पत्नी अनु (अमरोहा, बिजनौर) ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि 24 अप्रैल 2025 की रात करीब 8 बजे अरुण की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
आरोप है कि मौके पर मौजूद जिम्मेदारों ने न तो डॉक्टर बुलाया और न ही उसे अस्पताल पहुंचाया। इसके बजाय उसे कमरे में ले जाकर लिटा दिया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोपों को और गंभीर बनाते हुए कहा है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि साजिश भी हो सकती है।
शिकायत में आशंका जताई गई है कि अरुण को कुछ खिलाकर या गला दबाकर मार दिया गया। इस मामले में कंपनी के एमडी रवि लवानिया, डायरेक्टर सुलभा लवानिया, ब्रांच मैनेजर अनिल वर्मा, साइट इंचार्ज रिंकू शर्मा और सुपरवाइजर कमल किशोर को नामजद किया गया है।
ऐसा बताया गया है कि प्लांट में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहले भी अनदेखी की शिकायतें मिलती रही हैं। बावजूद इसके, जिम्मेदारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। अब एक मजदूर की मौत के बाद पूरा मामला सवालों के घेरे में है। यह घटना न सिर्फ श्रमिक सुरक्षा मानकों की पोल खोलती है, बल्कि ठेका व्यवस्था में जवाबदेही की कमी को भी उजागर करती है।
अब देखना होगा कि जांच में सच क्या निकलता है और क्या मृतक को न्याय मिल पाता है या नहीं। वहीं, श्यामपुर थाना प्रभारी नितेश शर्मा ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज कर जांच शुरू की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।


