
पंच👊नामा
रूड़की: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत जहां बच्चों के लिए नई उम्मीदें लेकर आई है, वहीं अभिभावकों के लिए यह दौर आर्थिक दबाव और मजबूरियों का सबब बनता जा रहा है। रुड़की, ग्रामीण इलाके में प्राइवेट स्कूलों और बुक सेंटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, जहां कोर्स के नाम पर मनमानी और शर्तों का खेल खुलकर सामने आ रहा है।
ताजा मामला पिरान कलियर क्षेत्र से सामने आया है, जहां मुनव्वर अली साबरी नामक एक अभिभावक ने मुख्य शिक्षा अधिकारी से शिकायत कर पूरे सिस्टम की हकीकत उजागर की। अभिभावक के अनुसार, जब वह अपने बच्चे के लिए किताबें लेने सिविल लाइन स्थित केम्ब्रिज बुक सेंटर पहुंचे, तो उन्हें साफ तौर पर कह दिया गया कि केवल किताबें नहीं मिलेंगी—कोर्स के साथ स्कूल बैग लेना अनिवार्य है।
जब अभिभावक ने इस ‘शर्त’ का विरोध किया, तो उन्हें किताबें देने से ही मना कर दिया गया। आखिरकार, बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इस डर से उन्हें मजबूरी में महंगे दामों पर बैग खरीदना पड़ा। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि संबंधित स्कूल का कोर्स केवल उसी दुकान पर उपलब्ध बताया गया, जिससे अभिभावकों के पास कोई विकल्प ही नहीं बचता।
यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—क्या यह केवल एक दुकान की मनमानी है या इसके पीछे स्कूलों और बुक सेंटरों का संगठित गठजोड़ काम कर रहा है? क्या ‘फिक्स्ड दुकान’ के जरिए कमीशन का खेल चल रहा है? और क्या शिक्षा के नाम पर अभिभावकों को इस तरह आर्थिक रूप से मजबूर करना जायज है?
मुख्य शिक्षा अधिकारी नरेश कुमार हल्दियानी ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। हालांकि, अभिभावकों के मन में यह आशंका भी है कि कहीं यह मामला भी औपचारिक जांच तक सीमित न रह जाए।
फिलहाल, रुड़की में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे ये सवाल यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या पढ़ाई अब सुविधा से ज्यादा ‘सौदेबाजी’ का माध्यम बनती जा रही है—और अगर ऐसा है, तो इसका अंत कहां होगा?
मुनव्वर अली साबरी ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर वह स्कूल प्रबंधन से भी शिकायत करेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के नाम पर इस तरह की जबरदस्ती बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कोशिश करेंगे कि स्कूल प्रबंधन ऐसे बुक सेंटरों से कोर्स दिलाने की व्यवस्था न करे, जहां अभिभावकों पर अतिरिक्त सामान खरीदने का दबाव बनाया जाता हो।


